नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच सोशल मीडिया यूजर्स एक वीडियो शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि ईरान ने अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन को निशाना बनाया है। इस दावे के साथ एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें समुद्र के बीच एक युद्धपोत को आग की लपटों में घिरा हुआ देखा जा सकता है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को गलत पाया। वायरल हो रहा वीडियो वास्तविक नहीं, बल्कि क्रिएटेड है। गौरतलब है कि ईरान ने इस एयरक्राफ्ट कैरियर को मिसाइल से निशाना बनाने का दावा किया था, जिसका अमेरिका ने खंडन किया है।

क्या है वायरल?

सोशल मीडिया यूजर ‘Iran Press’ ने 18 मार्च 2026 को वायरल वीडियो (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा, “BREAKING – Circulating online: Reports circulating on social media claim that the U.S. warship USS Abraham Lincoln was reportedly struck by Iranian missiles, sustaining heavy damage, before allegedly returning to U.S. waters, according to circulating.”

(“ब्रेकिंग: ऑनलाइन चल रही खबरें: सोशल मीडिया पर चल रही रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर कथित तौर पर ईरानी मिसाइलों से हमला हुआ, जिससे उसे भारी नुकसान पहुंचा। इसके बाद वह कथित तौर पर अमेरिकी जलक्षेत्र में लौट आया।”)

जांच किए जाने तक इस वायरल वीडियो को करीब 30 लाख से अधिक व्यूज मिल चुके हैं।

पड़ताल

वायरल वीडियो में समुद्र में एक एयरक्राफ्ट कैरियर को आग की लपटों में घिरा हुआ देखा जा सकता है। हालांकि, इस वीडियो के फ्रेम दर फ्रेम एनालिसिस को देखने से इसमें कई विसंगतियां नजर आती हैं, जो इसके वास्तविक होने पर संदेह पैदा करती हैं। साथ ही इस कैरियर पर कोई एयरक्राफ्ट भी नजर नहीं आ रहा है।

वायरल वीडियो के किसी भी फ्रेम में एयरक्राफ्ट कैरियर पर कोई विमान नजर नहीं आ रहा है।

अलग-अलग डीपफेक डिटेक्शन टूल्स की एनालिसिस इस वीडियो के एआई-क्रिएटेड होने की संभावना की पुष्टि करती हैं। इस वीडियो में जिस ऑडियो क्लिप का इस्तेमाल किया गया है, उसमें भी कई फ्रेम एआई क्रिएटेड है।

aiornot टूल की एनालिसिस भी इस मल्टीमीडिया के एआई क्रिएटेड होने की संभावना की पुष्टि करती है।

अमूमन इस तरह के वीडियो को पहले कोई क्रिएट करता है, जिसके बाद इसे धड़ल्ले से शेयर किया जाता है। इसलिए हमने इसके ऑरिजिनल सोर्स को ढूंढा।

वायरल वीडियो के अलग-अलग फ्रेम को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें यह वीडियो ’96__w6′ इंस्टाग्राम यूजर (आर्काइव लिंक) की प्रोफाइल पर मिला। 28 फरवरी 2026 को साझा किए गए इस वीडियो के साथ दी गई जानकारी में ऑथर, यानी लेखक ने इसे एआई की मदद से बनाया हुआ बताया है।

96__w6′ इंस्टाग्राम यूजर (आर्काइव लिंक) की प्रोफाइल, जहां इस वीडियो के एआई क्रिएटेड होने की जानकारी दी गई है।

सर्च में हमें अमेरिकी सेंटकॉम (सेंट्रल कमांड) के आधिकारिक एक्स प्रोफाइल से शेयर किया हुआ एक पोस्ट मिला, जिसमें बताया गया है कि लिंकन किसी भी हमले की चपेट में नहीं आया है। साथ ही इस पोस्ट में एयरक्राफ्ट कैरियर की तस्वीरों को भी साझा किया गया है।

https://twitter.com/CENTCOM/status/2028124242273767557

सर्च में हमें 17 मार्च की रॉयटर्स की रिपोर्ट भी मिली, जिसमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले का नाम) को सपोर्ट किए जाने का जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, “6 मार्च 2026 को एक अज्ञात स्थान से ईरान पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ हमले के दौरान, यूएस नेवी के निमित्ज-श्रेणी के एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के फ्लाइट डेक से एक F/A-18F सुपर हॉर्नेट ने उड़ान भरी।”

एक अन्य न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, “ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिका ने अपने दो प्रमुख एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन, को नई जगहों पर तैनात किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तैनाती का मकसद जवाबी क्षमता को मजबूत करना और हालात में लगातार हो रहे बदलावों के बीच ऑपरेशनल तैयारी सुनिश्चित करना है।”

क्या है संदर्भ?

ईरान के इस्लामिक रेवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने ओमान की खाड़ी में मौजूद अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर मिसाइल से हमले का दावा किया। हालांकि, अमेरिका ने इन हमलों के दावों को नकार दिया।

https://twitter.com/CENTCOM/status/2028124242273767557

अमेरिकी सेंटकॉम ने बताया, “लिंकन पर कोई हमला नहीं हुआ। दागी गईं मिसाइलें उसके आस-पास भी नहीं फटक पाईं।”

acleddata.com‘ पर मौजूद ईरान संकट इंडेक्स के मुताबिक, 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की शुरुआत की थी, जो अब भी जारी है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए पश्चिम एशिया के कई देशों को निशाना बनाया है, जो अमेरिका के सहयोगी हैं। इस इंडेक्स में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, ईरानी पलटवार और अमेरिका-इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के ठिकानों को देखा जा सकता है।

वायरल वीडियो को शेयर करने वाले सोशल मीडिया हैंडल का नाम ‘ईरान प्रेस’ है, जो इसके ईरान से जुड़े होने का भ्रम पैदा करता है। इस अकाउंट के साथ उपलब्ध जानकारी बताती है कि इसके यूजर नेम में दो बार बदलाव हो चुका है और इसमें आखिरी बदलाव फरवरी 2026 में हुआ था, जो अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के समय से मेल खाता है।

इस अकाउंट से अक्सर गलत सूचनाएं और AI-जनरेटेड वीडियो शेयर की जाती हैं और यह मुख्य रूप से भू-राजनीतिक मुद्दों, विशेष रूप से ईरान-इजरायल संघर्ष से संबंधित सामग्री साझा करता है। फैक्ट चेक की शुरुआत में जब हमने इस हैंडल को आर्काइव किया था, तब इसका यूजर नेम (18 मार्च) ‘Iran Press’ था, जो 19 मार्च को बदलकर ‘News Now’ हो चुका है।

वायरल दावे को लेकर हमने इस युद्ध को कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट मधुरेंद्र कुमार से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया, “अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंक पर हमले की ऐसी कोई आधिकारिक सूचना उपलब्ध नहीं है।” ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध से संबंधित अन्य वायरल दावों की फैक्ट चेक रिपोर्ट्स को यहां पढ़ा जा सकता है।

विश्वास न्यूज स्वतंत्र रूप से यूएसएस अब्राहम लिंकन को हुए नुकसान के ईरान के दावे और अमेरिकी खंडन की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है लेकिन इसके साथ जो वीडियो वायरल हो रहा है, हम उसके एआई से बने होने की पुष्टि करते हैं।

निष्कर्ष: ईरानी मिसाइल हमले में अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन के क्षतिग्रस्त होने के दावे से वायरल हो रहा वीडियो वास्तविक नहीं, बल्कि एआई-क्रिएटेड है। साथ ही जिस एक्स (पूर्व में ट्विटर) पेज से इसे शेयर किया गया है, उसके यूजर नेम में लगातार बदलाव किया जा रहा है

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