नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक दावे के साथ एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें रस्सी से बंधे तीन लोगों को पुलिस सरेआम लाठी मारते हुए दिख रही है। वीडियो में ‘लिंबायत पुलिस जिंदाबाद’ के नारे भी सुने जा सकते हैं। कुछ यूजर्स इसे शेयर कर दावा कर रहे हैं कि पुलिस हिंदुओं के साथ मिलकर मुसलमान आरोपियों को पीट रही है।
विश्वास न्यूज ने वायरल दावे की जांच की तो मामला गुजरात के सूरत का निकला। वहां पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपियों का जुलूस निकाला था। इस मामले में पीड़ित और आरोपी, दोनों पक्ष मुसलमान हैं। इस मामले को गलत सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या है वायरल पोस्ट?
इंस्टाग्राम यूजर ‘mohd_aamir_shahabuddin’ ने 8 मई 2026 को एक वीडियो शेयर (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा, “अगर आप मुसलमान हैं तो किसी अदालत की ज़रूरत नहीं है, आप पर लगाये गए इल्ज़ाम साबित करने की ज़रूरत नहीं है, बहुसंख्यक पुलिस के साथ मिल कर सड़क पर ही फ़ैसला कर देगी। यही सच्चाई है आज के इस बहुसंख्यक समाज के सत्ता की।“

पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने वीडियो का कीफ्रेम निकालकर उसे गूगल लेंस से सर्च किया। यूट्यूब चैनल ‘A12 NEWS’ पर 3 मई 2026 को अपलोड हुए वीडियो न्यूज में वायरल क्लिप को देखा जा सकता है।
गुजराती भाषा के इस वीडियो न्यूज को हमने गूगल जेमिनी की मदद से ट्रांसलेट किया। इसके मुताबिक, “मामला गुजरात के सूरत का है। यहां लिंबायत इलाके में कमूनगर पुलिस चौकी के पास जब एक पिता ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ हुई छेड़खानी का विरोध किया, तो आरोपियों ने पिता और उनके चचेरे भाई की हत्या कर दी। इस मामले के बाद स्थानीय लोगों ने आरोपियों के वाहनों में तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, हमले में लड़की के पिता और उनके रिश्तेदार की मौत हो गई थी।”
‘टीवी 13 गुजराती’ की वेबसाइट पर छपी खबर के अनुसार, “26 अप्रैल 2026 की रात को सूरत के लिंबायत में एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ का विरोध करने पर उसके पिता और रिश्तेदारों खालिक रजाक शेख व इकबाल पर पास में रहने वाले अमन अमजद, आवेश अमजद, अमजद मनियार, ज़ेबुन्निसा मनियार और एक नाबालिग ने हमला कर दिया। इसमें लड़की के पिता और इकबाल की मौत हो गई । पुलिस ने इस मामले में आरोपियों को पकड़ लिया । पुलिस ने हत्या के आरोपी पिता और उसके दो बेटों के साथ घटना का नाट्यरूपांतरण किया और आरोपियों को सरेआम लाठियों से पीटा।” खबर में पुलिस की गिरफ्त में आरोपियों की तस्वीर को भी अपलोड किया गया है।

सूरत पुलिस के एक्स हैंडल से 2 मई 2026 को आरोपियों का जुलूस निकालते हुए वीडियो पोस्ट किया गया था।
क्या है संदर्भ?
गुजरात के सूरत में एक नाबालिग लड़की से छेड़खानी का विरोध करने पर आरोपियों ने तीन लोगों पर हमला कर दिया था। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की वेबसाइट पर 28 अप्रैल 2026 को छपी रिपोर्ट के अनुसार, लड़की से कथित छेड़छाड़ का विरोध करने पर लिंबायत इलाके में एक परिवार के पांच लोगों ने 39 साल के एक आदमी की हत्या कर दी। इस मामले में लड़की के पिता की मौत हो गई, जबकि खालिक शेख और इकबाल घायल हैं।
इस मामले में हमने लिंबायत पुलिस थाना के प्रभारी डीडी चौहान से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि इस मामले में पीड़ित पक्ष भी मुस्लिम समुदाय से है। छेड़छाड़ का विरोध करने पर आरोपियों ने लड़की के पिता और उसके रिश्तेदारों पर हमला कर दिया था। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई थी। आरोपी भी मुसलमान हैं। इस घटना के बारे में गलत सांप्रदायिक दावा किया जा रहा है।
वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर शेयर करने वाले इंस्टाग्राम यूजर की प्रोफाइल को हमने स्कैन किया। एक खास विचारधारा से प्रभावित यूजर के करीब एक लाख 39 हजार फॉलोअर्स हैं। यह अकाउंट नवंबर 2020 में बना था।
निष्कर्ष: गुजरात के सूरत में हुए दोहरे हत्याकांड के मामले को गलत सांप्रदायिक रंग देकर वायरल किया जा रहा है। इस केस में पीड़ित और आरोपी, दोनों ही पक्ष मुसलमान हैं।
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