नई दिल्ली (शरद प्रकाश अस्थाना)। वर्ष 2024 के अक्टूबर माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में साइबर स्कैम के बढ़ते मामलों, खासकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम को लेकर गहरी चिंता जताई थी। यह चिंता लाजिमी भी है, क्योंकि साल जरूर बदला, लेकिन साइबर क्राइम का ग्राफ और ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर कम नहीं हुआ। वहीं, इस साल पहलगाम हमले के बाद देश के कई सेक्टरों को साइबर हमलों का सामना भी करना पड़ा।
क्या कहते हैं NCRP के आंकड़े?
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर 2022 में 10 लाख से ज्यादा केस दर्ज हुए थे। जो 2023 में करीब 16 लाख और 2024 में 22.68 हजार से अधिक हो गए। 2024 में 2023 के मुकाबले दर्ज मामलों में 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। अब अगर बात 2025 के शुरुआती छह माह यानी 30 जून 2025 तक दर्ज आंकड़ों की करें, तो जनवरी से लेकर जून 2025 तक पूरे देश में करीब 12.47 लाख केस एनसीआरपी पर रिपोर्ट किए गए हैं।

इनमें से सबसे ज्यादा केस महाराष्ट्र में करीब 1.60 लाख रहे। इसके बाद नंबर आता है उत्तर प्रदेश (1.48 लाख), कर्नाटक (1.02 लाख), दिल्ली (89,646) और गुजरात (88,383) का।

आर्थिक नुकसान तेजी से बढ़ा
वर्ष 2024 में देश में साइबर फाइनेंशियल फ्रॉड में लोगों को 22 हजार 845 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के जरिए दर्ज फाइनेंशियल नुकसान में तेजी से बढ़ोतरी हुई। 2022 में 2 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये तो 2023 में 7 हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। 2024 में यह तीन गुना हो गया था। 2024 में साइबर फ्रॉड के कारण लोगों को करीब 23 हजार करोड़ रुपये गंवाने पड़े।

डिजिटल पेमेंट से 520 करोड़ उड़ाए
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2024-25 की रिपोर्ट बताती है कि पूरे देश में इस दौरान बैंक धोखाधड़ी के करीब 24 हजार केस सामने आए हैं, जिनमें करीब 36 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इनमें कार्ड/इंटरनेट यानी डिजिटल पेमेंट के जरिए होने वाली धोखाधड़ी का हिस्सा 56.5 फीसदी है। इनमें 520 करोड़ रुपये ठगों ने उड़ा लिए।

यूएस की रिपोर्ट दिखाती है दुनिया की झलक
फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) की इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर (IC3) की इंटरनेट क्राइम रिपोर्ट 2024 में यूएस में हुए साइबर अपराधों के बारे में पूरी विस्तृत जानकारी मिलती है, जो दुनिया में हो रही इस तरह के अपराधों की झलक दिखाती है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां 2024 में 8,59,532 मामलों में 16.6 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। इनमें सबसे ज्यादा करीब डेढ़ लाख शिकायतें वरिष्ठ नागरिकों यानी 60 प्लस वर्ग के लोगों ने दर्ज कराई। इसके बाद नंबर आता है 40-49 (1,12,755) और 30-39 (1,08,899) आयु वर्ग के लोगों का। रिपोर्ट के मुताबिक, वहां फिशिंग/स्पूफिंग के सबसे ज्यादा केस सामने आए। इसके अलावा एक्सटॉर्सन, पर्सनल डेटा ब्रीच, इन्वेस्टमेंट, टेक सपोर्ट, कॉन्फिडेस/रोमांस और क्रेडिट कार्ड जैसे स्कैम के जरिए ठगी की गई।

‘डिजिटल अरेस्ट’ में गई जान
पीएम मोदी ने ’डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम को लेकर ‘मन की बात’ में जो चिंता जताई थी, वो लाजिमी है। इस तरह की धोखाधड़ी में स्कैमर्स खुद को ईडी, सीबीआई, पुलिस या साइबर पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को उनके दस्तावेजों के ‘गैरकानूनी’ दुरुपयोग या उनके परिजनों के किसी गंभीर मामले में पकड़े जाने का डर दिखाकर डराते हैं और उन्हें एक कमरे में बंद रहने को मजबूर कर देते। इस बीच उनको किसी से भी संपर्क नहीं करने को भी कहा जाता है। इस तरह से साइबर अपराधी लोगों को कई दिन तक डिजिटली ‘हिरासत’ में ले लेते हैं। इस दौरान वह पीड़ित पर वीडियो के जरिए नजर भी रखते हैं।
देश में इस तरह के स्कैम में कई मामले सामने आए, जिनमें कुछ की तो जान भी चली गई। सितंबर 2025 में ऐसा ही एक मामला हैदराबाद में सामने आया था। वहां, एक लेडी मेडिकल ऑफिसर को साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम से धमकाया और प्रताड़ित किया। उनसे साइबर अपराधियों ने 5 सितंबर को संपर्क किया था। 8 सितंबर को कार्डियक अरेस्ट आने से उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद उनके फोन पर लगातार मैसेज आ रहे थे।
दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को हुए धमाके के बाद साइबर अपराधी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) या एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) बनकर लोगों को डरा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला कानपुर से सामने आया है।
‘डिजिटल अरेस्ट’ और संबंधित अपराधों की संख्या बढ़ी
आंकड़ों की बात करें तो एनसीआरपी पोर्टल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ और उससे संबंधित अपराधों की संख्या पिछले तीन साल में बढ़ी है। 2022 में यह संख्या 39925 थी, जो 2023 में बढ़कर 60 हजार पार हो गई। इसके बाद 2024 में यह सवा लाख के पास पहुंच गई। वर्ष 2025 में फरवरी तक ऐसे 17 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके थे। अब बात करते हैं ऐसे स्कैम में अपराधियों ने कितने रुपये ठगे। 2022 में इस तरह की ठगी से लोगों को करीब 91 करोड़ तो 2023 में 339 करोड़ के आसपास का नुकसान हुआ। 2025 में यह आंकड़ा दो हजार करोड़ रुपये के पास तक पहुंचा, जबकि 2025 में फरवरी तक 210 करोड़ के लगभग का लोगों को चूना लगाया गया।

पहलगाम हमले के बाद हुए लाखों साइबर हमले
22 अप्रैल को पहलगाम पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था। इस दौरान भारत के कई सेक्टरों में साइबर हमले भी हुए थे। महाराष्ट्र साइबर ने सात एडवांस्ड परसिस्टेंट थ्रेट (APT) ग्रुप्स की पहचान की थी, जो पहलगाम हमले के बाद पूरे देश में क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर वेबसाइटों को निशाना बनाकर 15 लाख से ज्यादा साइबर अटैक करने के लिए जिम्मेदार थे। इनमें से सिर्फ 150 अटैक ही सफल हुए। ‘रोड ऑफ सिंदूर’ रिपोर्ट में इन हमलों के बारे में विस्तार से बताया गया था। ये साइबर अटैक बांग्लादेश, पाकिस्तान, मिडिल ईस्ट और एक इंडोनेशियाई ग्रुप से हुए थे। सीजफायर के बाद भी ये हमले रुके नहीं।
इसके लिए हैकर्स ने मैलवेयर कैंपेन, डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल-ऑफ-सर्विस (DDoS) अटैक और GPS स्पूफिंग तरीकों का इस्तेमाल किया था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इन ग्रुप्स ने भारत के बैंकिंग सिस्टम को हैक करने और बिजली गुल करने का झूठा दावा भी किया।
साइबर फ्रॉड के प्रमुख प्रकार
क्रिप्टोकरेंसी क्राइम: इनमें साइबर अपराधी फिशिंग या इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के जरिए पीड़ित को क्रिप्टो करेंसी में निवेश करने के लिए उकसाता है।
साइबर टेररिज्म: देश में अशांति या आतंक फैलाने के मकसद से साइबर अटैक किए जाते हैं। इसमें हैकिंग, डेटा चोरी, सिस्टम को बंद करना (DDoS हमले) और इंटरनेट का उपयोग करके योजना बनाना शामिल है।
हैकिंग: किसी अकाउंट या सिस्टम का बिना अनुमति के एक्सेस ले लेना। इसका मकसद यूजर की जानकारी चुराना, नुकसान पहुंचाना या सिस्टम पर कंट्रोल करना होता है। इसके लिए अक्सर फिशिंग का इस्तेमाल किया जाता है।
ऑनलाइन एंड सोशल मीडिया रिलेटेड क्राइम: इस तरह के साइबर अपराध में साइबर बुलिंग/ स्टॉकिंग/ सेक्सटिंग, ईमेल फिशिंग, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, पहचान की चोरी और ऑनलाइन मैट्रिमोनियल फ्रॉड जैसे अपराध शामिल हैं।
ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड: इसमें डेबिट/क्रेडिट कार्ड फ्रॉड/ सिम स्वैप फ्रॉड, डीमैट/ डिपोजिटरी फ्रॉड, ईवॉलेट संबंधित फ्रॉड, विशिंग, इंटरनेट बैंकिंग संबंधित फ्रॉड और यूपीआई फ्रॉड शामिल हैं।
रैंसमवेयर: इसके जरिए साइबर अपराधी दूर से कंप्यूटर सिस्टम को हैक करके एन्क्रिप्ट कर देते हैं और डेटा को वापस देने और/या लीक न करने के बदले में फिरौती मांगते हैं। इस तरह के हमलों से व्यक्तियों और संगठनों को निशाना बनाया जाता है।
ट्रेंड्स
साइबर फ्रॉड अब एक तरीके तक ही सीमित नहीं हैं। अपराधी लोगों को फंसाने के अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। ये अक्सर नई टेक्नोलॉजी और यूजर के व्यवहार के हिसाब से बदलते रहते हैं। ईडी की 2024-25 रिपोर्ट में ऐसे साइबर क्राइम्स के बारे में बताया गया है।
पिग बुचरिंग: यह रोमांस स्कैम और इन्वेस्टमेंट स्कैम का मिश्रण है। खासतौर से क्रिप्टोकरेंसी निवेश को चुना जाता है। इसके तहत ऑनलाइन (डेटिंग ऐप) मिले पीड़ित का भरोसा जीतकर उसे प्राइवेट मैसेजिंग सर्विस/ऐप पर जाने के लिए कहता है। फिर पीड़ित को निवेश करवाता है, जिसमें यूजर के साथ ठगी होती है। ठगी के बाद स्कैमर गायब हो जाता है और यूजर को आर्थिक नुकसान भी होता है।
फैंटम हैकिंग: इसको फैंटम हैकर स्कैम भी कहा जाता है। यह टेक सपोर्ट स्कैम का एक नया रूप है, जो खासकर बुज़ुर्ग नागरिकों को निशाना बनाता है। इसे एक बढ़ते खतरे के रूप में पहचाना गया है। इसमें ठग लोगों को डराते हैं कि आपका कंप्यूटर या बैंक अकाउंट हैक हो गया है। इसके बाद वे खुद को टेक सपोर्ट, बैंककर्मी या सरकारी अधिकारी बताकर यूजर को कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। इसके बाद सिस्टम का एक्सेस हैकर्स के पास चला जाता है। इससे वह पीड़ित को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम: ईडी, सीबीआई, एनआईए, एटीएस या पुलिस अधिकारी बनकर ठग यूजर से संपर्क करते हैं और किसी मनगढ़ंत अपराध का आरोप लगाते हैं। घबराए हुए पीड़ित को फिर एक बड़ी रकम देने को कहा जाता है। इसमें पीड़ित को कई दिन तक ‘डिजिटली अरेस्ट’ रखा जाता है और उनसे ठगी की जाती है।
गैरकानूनी ऑनलाइन गेमिंग, बेटिंग और गैंबलिंग: इनमें ऐसे अनधिकृत ऑनलाइन बेटिंग प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो यूजर्स को स्पोर्ट्स या कैसिनो-स्टाइल गेम्स पर जुआ खेलने के लिए लुभाते हैं।
इंस्टेंट लोन ऐप: इस तरह के स्कैम में साइबर अपराधी गरीब या छात्रों को निशाना बनाते हैं। फटाफट लोन का झांसा देकर ये ऐप डाउनलोड कराते हैं और अन्य ऐप्स की परमिशन के जरिए यूजर की फोटो या अन्य डेटा चोरी कर लेते हैं। इसके बाद तस्वीरों को एडिट कर यूजर को ब्लैकमेल किया जाता है।
स्पूफिंग: इसका इस्तेमाल कई तरह के साइबर हमलों में किया जाता है। इसमें हैकर्स या सिस्टम (जैसे बैंक, दोस्त या वेबसाइट) असली होने का दिखावा करता है। जिसके जरिए वह यूजर की निजी जानकारी चुरा सकता है या सिस्टम में मैलवेयर डाल सकता है। इसके लिए वह फर्जी ईमेल, फेक वेबसाइट का सहारा लेता है। इसके जरिए हैकर्स जीपीएस सिग्नल (जीपीएस स्पूफिंग) को बदल सकते हैं। इसमें ठग फेक कॉलर आईडी का इस्तेमाल कर बैंक जैसी भरोसेमंद संस्थाओं के रूप में पेश आकर संवेदनशील जानकारी ले सकते हैं।

साइबर अपराध के खिलाफ कदम
21 अगस्त 2025 को ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025 को पारित किया गया। यह कानून ई-स्पोर्ट्स और सोशल ऑनलाइन गेम को प्रोत्साहित करने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि यह ऑनलाइन मनी गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है। इसमें उनके प्रचार, विज्ञापन और वित्तीय लेनदेन शामिल हैं।
फेक लोन ऐप्स के बारे में आरबीआई ने जुलाई 2025 में 1600 से ज्यादा डिजिटल लेंडिंग ऐप्स की लिस्ट जारी की थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की वित्त वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी साइबर क्राइम के 122 मामलों की जांच कर रही है। इनमें इन अपराधों से 20462 करोड़ रुपये की कमाई शामिल है। 5964 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच की गई है। जांच के दौरान कुल 96 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
2 दिसंबर 2025 को जारी पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर क्राइम के बढ़ते खतरों को देखते हुए टेलीकम्युनिकेशन विभाग ने 17 जनवरी 2025 को संचार साथी मोबाइल ऐप लॉन्च किया। इसके जरिए 42 लाख से ज्यादा चोरी या गुम हुए मोबाइल डिवाइस ब्लॉक किए गए। तीन करोड़ से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शन बंद किए गए। इनमें 1.43 करोड़ से अधिक वे कनेक्शन हैं, जिन्हें लोगों ने ‘मेरा नंबर नहीं है’ के तौर पर चिह्नित किया था। लोगों की रिपोर्ट के बाद करीब 41 लाख धोखाधड़ी वाले कनेक्शन हटाए गए और ऐसे 6.2 लाख IMEI ब्लॉक किए गए। इतना ही नहीं, करीब 17 लाख वॉट्सऐप अकाउंट निष्क्रिय किए गए और 20 हजार से अधिक बल्क एसएमएस भेजने वालों को ब्लैकलिस्ट किया गया।

1 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े मामलों की जांच के लिए सीबीआई को स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करने का आदेश दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि सीबीआई एफआईआर न होने पर भी उन खातों को फ्रीज कर सकती है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों और फ्रॉड में किया गया हो।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय के सहयोग पोर्टल से सरकार ने अक्टूबर 2024 और 8 अप्रैल 2025 के बीच ऑनलाइन प्लेटफार्मों को 130 सेंसरशिप नोटिस जारी किए हैं। इस पोर्टल को 2024 में शुरू किया गया था। यह ऑनलाइन सामग्री को हटाने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।
विश्वास न्यूज पर छपे आर्टिकल्स
वर्ष 2025 में 1 जनवरी से 10 दिसंबर तक विश्वास न्यूज ने हिंदी के 1546 आर्टिकल्स छपे हैं। इनमें स्कैम के 61, फाइनेंशियल फ्रॉड के 11, डिजिटल फ्रॉड के 9 और ब्रांड सेफ्टी की एक स्टोरी शामिल है।

विश्वास न्यूज के पोर्टल पर अगस्त 2025 तक स्कैम कैटेगरी के अंतर्गत 397 आर्टिकल छपे हैं। इनमें से फाइनेंशियल फ्रॉड के 332 और नॉन फाइनेंशियल फ्रॉड के 65 आर्टिकल हैं। इनमें सबसे ज्यादा फाइनेंशियल स्कैम के अंतर्गत फाइल हुए, जबकि फिशिंग की स्टोरी सबसे ज्यादा रहीं।
2026 की चुनौती
गूगल क्लाउड की साइबर सिक्योरिटी फोरकास्ट 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2026 में एआई जेनरेटेड (डीपफेक, ऑटोनॉमस हैकिंग) हमले बड़े चुनौती साबित होंगे। इसके अलावा रैनसमवेयर, डेटा चोरी और एक्सटॉर्शन दुनिया भर में सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसके अलावा 2025 के अन्य प्रमुख ट्रेंड्स का विश्लेषण करती विश्वास न्यूज की रिपोर्ट को यहां पढ़ें।
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