नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में बहुत से कार्यकर्ता पथ संचलन करते हुए देखे जा सकते हैं। वीडियो को शेयर करते हुए यूजर दावा कर रहे हैं कि तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में कोर्ट के आदेश के बाद भारी पुलिस सुरक्षा के बीच आरएसएस ने पथ संचलन किया हैऔर यह उसी का वीडियो है।

विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल किया जा रहा दावा भ्रामक है। यह वीडियो तमिलनाडु का नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के रतलाम का है। अक्टूबर 2025 में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आरएसएस का यह पथ संचलन आयोजित किया गया था।

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक यूजर ‘Umesh Ji पूर्व प्रचारक आरएसएस’ ने वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “कोर्ट के ऑर्डर के बाद बेहद भारी पुलिस सुरक्षा में तिरुवन्नामलाई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक का पथ संचलन किसी भी टीवी मीडिया में यह नहीं दिखाया गया।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने वायरल वीडियो के ऑरिजिनल  सोर्स को ढूंढ़ना शुरू किया। हमें यह वीडियो journalist_av नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6 अक्टूबर 2025 को शेयर किया हुआ मिला। यहां वीडियो के साथ टाइटल दिया गया था, “रतलाम में RSS के शताब्दी वर्ष पर भव्य पथ संचलन।”

इसी बुनियाद पर कीवर्ड्स से सर्च करने पर हमें वायरल वीडियो RSS_Sattur नाम के एक्स हैंडल पर 6 अक्टूबर 2025 को शेयर किया हुआ मिला। यहाँ बताया गया कि वीडियो मध्य प्रदेश के रतलाम का है, जहाँ आरएसएस का पथ संचलन किया गया था।

न्यूज 18 और दैनिक भास्कर की अक्टूबर 2025 की ख़बरों के अनुसार, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रतलाम शहर में भव्य पथसंचलन निकाला गया। पांच अलग-अलग स्थानों से शुरू हुआ यह संचलन सैलाना बस स्टैंड क्षेत्र में महासंगम के रूप में संपन्न हुआ। करीब 20 हजार से अधिक स्वयंसेवक कतारबद्ध होकर, कदमताल करते और जयघोष लगाते हुए आगे बढ़े।”

वायरल वीडियो से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने हमारे सहयोगी नईदुनिया के रतलाम के ब्यूरो चीफ नरेंद्र शर्मा से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि रतलाम का ही अक्टूबर का वीडियो है।

बताते चलें कि तमिलनाडु में RSS के “रूट मार्च या पथ संचलन” को लेकर पिछले कुछ वर्षों से विवाद चलता रहा है। RSS विजयदशमी के मौके पर कई जिलों में रूट मार्च करना चाहती थी, लेकिन राज्य सरकार और पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला देकर कई जगह कई बार अनुमति नहीं दी। इसके बाद RSS ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने शर्तों के साथ कई स्थानों पर मार्च की अनुमति दी थी। राज्य सरकार ने इस फैसले को 2023 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया। कोर्ट के आदेश के बाद कुछ जगहों पर भारी पुलिस सुरक्षा के बीच RSS के मार्च कराए भी गए। इसी पुराने कानूनी विवाद के संदर्भ में अब सोशल मीडिया पर अलग-अलग जगहों के वीडियो तमिलनाडु का बताकर गलत दावे किए जा रहे हैं।

अब बारी थी भ्रामक पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर ‘Umesh Ji पूर्व प्रचारक आरएसएस’ की सोशल स्कैनिंग की। हमने पाया कि यूजर को 64 हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं।

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