<strong><em>विश्वास न्यूज के टिपलाइन पर भेजे गए क्लेम का स्क्रीनशॉट।</em></strong>

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। नेपाल में हुए जेन-जी आंदोलन के बाद वहां अंतरिम सरकार का गठन हो चुका है। इसी से जोड़कर सोशल मीडिया यूजर्स एक वीडियो को शेयर करते हुए दावा कर रहे हैं कि नेपाल में हुए आंदोलन के बाद अब यह देश फिर से ‘हिंदू राष्ट्र’ बन चुका है।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को गलत पाया। नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद वहां सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख नियुक्त किया गया है और अंतरिम सरकार की सिफारिश पर वहां की संसद को भंग किया जा चुका है और इस अंतरिम सरकार को वहां छह महीने के भीतर चुनाव कराना होगा, जिसके बाद नेपाल में नई सरकार का गठन होगा। इस बीच नेपाल के संविधान में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वह संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बना हुआ है।

क्या है वायरल?

विश्‍वास न्‍यूज के टिपलाइन नंबर +91 9599299372 पर भी कई यूजर्स ने वीडियो को शेयर किया है, जिसमें नेपाल के फिर से ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित होने का दावा किया गया है।

विश्वास न्यूज के टिपलाइन पर भेजे गए क्लेम का स्क्रीनशॉट।

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस वीडियो (आर्काइव लिंक)को समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है।

पड़ताल

न्यूज सर्च में हमें ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली, जिसमें वायरल वीडियो में किए गए दावे की पुष्टि हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल में हुए जेन-जी आंदोलन के बाद वहां अंतरिम सरकार का गठन हो चुका है और इसी सरकार की सिफारिश पर वहां की संसद को भंग किया जा चुका है।

न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल के बड़े राजनीतिक दलों ने संसद को भंग किए जाने के फैसले का विरोध करते हुए इसे बहाल  किए जाने की मांग की है।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, “नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दलों ने देश के राष्ट्रपति से संसद को बहाल किए जाने की मांग की है, जिसे भ्रष्टाचार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के बाद भंग कर दिया गया है ।

नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल और माओवादी केंद्र सहित आठ दलों ने एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने असंवैधानिक तरीके से काम किया है।”

रिपोर्ट के मुताबिक, नवनियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सिफारिश पर पौडेल ने शुक्रवार को प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया, क्योंकि यह विरोध आंदोलन की प्रमुख मांग भी थी।

हालांकि, हमें किसी भी रिपोर्ट में नेपाल को वापस ‘हिंदू राष्ट्र’ का घोषित किए जाने का जिक्र नहीं मिला। नेपाल सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर हमें इस देश के संविधान की कॉपी मिली, जिसके अनुच्छेद 1 के मुताबिक, “नेपाल एक स्वतंत्र, अविभाजित, संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समावेशी, लोकतांत्रिक, समाजवाद आधारित, संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र है।”

नेपाल का संविधान नेपाल को नेपाल एक स्वतंत्र, अविभाजित, संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, समावेशी, लोकतांत्रिक, समाजवाद आधारित, संघीय लोकतांत्रिक गणतंत्र बताता है। Source:ag.gov.np

नेपाल में राजतंत्र के समर्थन में रैलियां निकलती रही हैं। 31 मार्च 2025 की इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मतुाबिक, “नेपाल में राजशाही समर्थक प्रदर्शनकारियों द्वारा राजा की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन चलाया जा रहा है। 2008 के बाद से, जब आखिरी हिंदू राष्ट्र ने राजशाही को समाप्त किया था, यह राजा के समर्थन में सबसे बड़ा और सबसे लंबा आंदोलन है।”

वायरल दावे को लेकर हमने नेपाल स्थित पत्रकार घनश्याम खड़का से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया, “अभी तक नेपाल के संविधान और नेपाली राज्य के स्वरुप में कोई बदलाव नहीं किया गया है।”

वायरल पोस्ट को शेयर करने वाले यूजर को फेसबुक पर करीब 25 हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद देश को वापस हिंदू राष्ट्र घोषित किए जाने का दावा गलत है। नेपाल में अंतरिम सरकार की सिफारिश पर संसद को भंग किया जा चुका है और कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर सुशीला कार्की ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली है। इस बीच नेपाल के संवैधानिक दर्जे में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नेपाल अभी भी धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र है।

The post Fact Check: भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद नेपाल के ‘हिंदू राष्ट्र’ घोषित होने का दावा FAKE appeared first on Vishvas News.

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