नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक तरफ मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज अदा करते हुए देखा जा सकता है। वहीं, दूसरी ओर, कुछ लोग रामलीला का मंचन कर रहे हैं। वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि देश का माहौल बिगाड़ने के लिए नमाज अदा करने वालों के पीछे जानबूझकर रामलीला का मंचन किया गया। वीडियो को सांप्रदायिक तरीके से वायरल किया जा रहा है।
विश्वास न्यूज ने विस्तार से इसकी पड़ताल की। दावा भ्रामक और गुमराह करने वाला है। दरअसल, वाराणसी के लाट भैरव क्षेत्र में एक ही सार्वजनिक चबूतरे पर कई वर्षों से नमाज और रामलीला होती आई है। यह कोई विवाद या जानबूझकर की गई घटना नहीं है।
क्या हो रहा है वायरल?
फेसबुक पेज आप हरियाणा ने एक वीडियो को पोस्ट करते हुए दावा किया, “देश का माहौल बिगाड़ने मे सरकार की जबरदस्त कोशिश चल रही है। मुस्लिम धर्म के लोग नमाज अदा कर रहे है ओर लोग जानबूझकर उनके पीछे राम लीला कर रहे है। वैसे ज़ब नवरात्री मे मुस्लिमों की एंट्री बैन कर दी है तो नमाजियो के पास राम लीला की एंट्री बैन क्यों नहीं हुई..?? पूछता है भारत..??”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों ही लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखा जा सकता है।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले कीवर्ड के आधार पर सर्च किया। गूगल ओपन सर्च टूल की मदद से सर्च करने पर हमें विश्वसनीय समाचार रिपोर्ट मिली, जिसमें पूरी सच्चाई बताई गई। 26 सितंबर 2025 को वीडियो को अपलोड करते हुए अमर उजाला की वेबसाइट पर लिखा गया, “बेहद हसीन वो शाम हो जाए जब हर हिंदू में हो खुदा और मुस्लिम में राम नाम हो जाए…। 500 साल पुरानी लाटभैरव की रामलीला में कुछ ऐसा ही नजारा जीवंत हो उठा। एक तरफ अजान में अल्लाह हू अकबर… तो दूसरी ओर ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक पर मंगल भवन अमंगल हारी… गूंज रहा था।”
सर्च के दौरान हमें वायरल वीडियो से जुड़ी एक वीडियो रिपोर्ट मिली। डेन काशी नाम के एक यूट्यूब चैनल पर मौजूद रिपोर्ट में बताया गया कि बनारस के लाट भैरव मंदिर के चबूतरे पर नमाज और रामलीला एक साथ हुई। यह बरसों से होता आ रहा है। आपसी सौहार्द का यह अनोखा उदाहरण है।
इसी तरह ईटीवी भारत की वेबसाइट पर भी हमें एक खबर मिली। 26 सितंबर की इस खबर में बताया गया, लाट भैरव मंदिर के चबूतरे पर जहां एक तरफ मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ते हैं। वहीं, दूसरी तरफ रामचरित मानस की चौपाइयां गूंजती हैं। यह तस्वीर तब और गहरी छाप छोड़ जाती है, जब हिंदू-मुस्लिम दोनों एकजुट होकर इस परंपरा को कायम रखते हैं।

जांच को आगे बढ़ाते हुए हमने दैनिक जागरण, वाराणसी के संस्करण को स्कैन किया । हमें 26 सितंबर के ईपेपर में वायरल वीडियो से जुड़ी एक तस्वीर मिली। इसमें बताया गया कि श्रीआदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम काशी की ओर से लाट भैरव मंदिर प्रांगण में किया गया लीला का मंचन। साथ ही सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई नमाज।

अब तक की हमारी जांच में वायरल पोस्ट में किया गया दावा सांप्रदायिक और झूठा साबित हुआ।
विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण, वाराणसी के आउटपुड हेड शाश्वत मिश्र से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। सौहादपूर्ण तरीके से बरसों से लाट भैरव के चबूतरे पर यह कार्यक्रम हर साल होता है।
जांच के अंत में हमने गलत दावा करने वाले यूजर की जांच की। इसे एक हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यूजर हरियाणा का रहने वाला है।
निष्कर्ष : विश्वास न्यूज की पड़ताल में वायरल दावा गलत साबित हुआ। नमाज के दौरान जानबूझकर रामलीला नहीं की गई थी। दरअसल वाराणसी के लाट भैरव के चबूतरे पर यह परंपरा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। हमारी जांच में वायरल पोस्ट में किया गया दावा भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत साबित हुआ। नमाज व रामलीला का वीडियो सांप्रदायिक सौहार्द का उदाहरण है। इसमें कोई विवाद नहीं है।
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