नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। उत्तर प्रदेश के बरेली में हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया के अलग- अलग प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल हो रहा वीडियो सड़क के किनारे बने हुए घरों का है। वहीं, वीडियो में सभी घर टूटे हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि बरेली में हिंसा के बाद हिंसा में कथित तौर पर शामिल जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, यह उसी का वीडियो है

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल किया जा रहा दावा भ्रामक है। इस वीडियो का बरेली या बरेली हिंसा के बाद हुई कार्रवाई से कोई लेना-देना नहीं है। वायरल हो रहा यह वीडियो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का उस वक्त का है, जब वहां अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई  की थी। अगस्त के इस वीडियो को भ्रामक दावे के साथ बरेली हिंसा के बाद वायरल किया जा रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक यूजर ने वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “बरेली का बाजार इतना साफ हो गया है। कई वर्षों पहले गिरा हुआ झुमका भी शायद अब मिल जाएगा।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने गूगल लेंस के जरिए वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को सर्च किया। सर्च करने पर हमें इससे मिलता-जुलता वीडियो आसिफ मुस्कान नाम के एक फेसबुक अकाउंट पर शेयर किया हुआ मिला। यहां वीडियो को 21 अगस्त 2025 को दीपालपुर (पाकिस्तान का शहर) के हवाले से शेयर किया हुआ मिला।

इसी बुनियाद पर हमने अपनी पड़ताल को आगे बढ़ाया और हमें यही वायरल वीडियो 23 अगस्त 2025 को एक टिकटॉक अकाउंट पर मिला। वीपीएन की मदद से हमने वीडियो को खोला, यहां भी वीडियो को पाकिस्तान के दीपालपुर का बताया गया है।

सर्च किये जाने पर हमें इसी मामले से जुड़ा वीडियो तहसील प्रेस क्लब दीपालपुर से मिला। वीडियो को 22 अगस्त को अपलोड किया गया है। दिए गए कैप्शन के अनुसार, “दीपालपुर के मेन बाज़ार गल्ला रोड पर अवैध कब्ज़ों के खिलाफ प्रशासन और पैरा फोर्स ने बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के तहत कई दुकानों को तोड़ा गया और पुलिस की तैनाती भी की गई, ताकि कोई विवाद न हो। कुछ दिन पहले प्रशासन ने दुकानदारों को 11 फुट की सीमा तय कर चेतावनी दी थी, लेकिन दुकाने खाली न करने पर यह कार्रवाई की गई।”

न्यूज सर्च में हमें एबीएन न्यूज़ का 22 अगस्त का बुलेटिन एक यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया हुआ मिला। इसमें दी गई जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान पंजाब के दीपालपुर में प्रशासन ने अवैध कब्ज़ों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कुछ दुकानें तोड़ी।    

वायरल वीडियो से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने पाकिस्तान के पत्रकार आदिल अली से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि यह वीडियो पाकिस्तान के पंजाब का है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की 3 अक्टूबर की खबर में बताया गया, 26 सितंबर को “आई लव मोहम्मद” पोस्टरों को लेकर प्रस्तावित विरोध रद्द होने के बाद जुमे की नमाज़ के बाद शहर के बीचोंबीच स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई और इस झड़प में कई लोग घायल हो गए। वहीं, पुलिस ने इस मामले में 10 एफआईआर दर्ज कर सैकड़ों अज्ञात लोगों को नामजद किया है और अब तक मौलाना तौकीर रज़ा ख़ान समेत उनके सहयोगियों व कुछ रिश्तेदारों सहित 70 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

इकोनॉमिक टाइम्स की 30 सितंबर की खबर के अनुसार, “उत्तर प्रदेश के बरेली में प्रशासन ने इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख मौलाना तौक़ीर रज़ा ख़ान के करीबी साथियों की संपत्तियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने मोहसिन रज़ा की संपत्तियों पर बुलडोज़र चलाया, उनका रिज़ॉर्ट सील कर दिया और मैरिज लॉन बंद कर दिया। अब तक 62 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और 150 करोड़ रुपये की संपत्तियां ज़ब्त की गई हैं।”

बरेली हिंसा के बाद कई पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनका विश्वास न्यूज़ ने भी फैक्ट चेक किया है। हमारा फैक्ट चेक यहां पढ़ें।

अब बारी थी भ्रामक पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक पेज दिव्य काशी की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि इस पेज को पांच हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। वहीं, इस प्रोफाइल से ज्यादातर विचारधारा विशेष से प्रेरित पोस्ट शेयर की जाती हैं।

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